रानी और राजा: गाज़ीपुर की प्रेम गाथा !
👑 रानी और राजा: गाज़ीपुर की प्रेमगाथा
🌸 कहानी का आरंभ – दो दिल, दो गांव
गाज़ीपुर जिले के एक छोटे से गाँव सेवराई में रहती थी एक लड़की, नाम था रानी यादव। रानी बचपन से ही सुंदर, होशियार और स्वाभिमानी थी। दूसरी ओर, कुछ ही दूरी पर बसे गाँव भदौरा में रहता था राजा सिंह, जो एक किसान परिवार से था, लेकिन पढ़ाई में अव्वल और सोच से बड़ा था।
रानी और राजा की पहली मुलाकात एक इंटर स्कूल स्पोर्ट्स कंपटीशन में हुई थी जो गाजीपुर शहर में हुआ था। रानी कबड्डी खेलती थी और राजा वॉलीबॉल में चैंपियन था। वहीं से दोनों की नजरें मिलीं… और शुरू हुआ एक अनकहा सा रिश्ता।
💌 चुपचाप पनपता प्रेम
रानी और राजा की मुलाकातें बढ़ती गईं – कभी गांव के मेले में, तो कभी खेत के रास्तों पर।
धीरे-धीरे चिठ्ठियों का दौर शुरू हुआ – पेन से लिखे हुए वो खत जो दिल से निकलते और सीधे दिल में उतरते।
राजा रानी से कहा करता था,
"तुम गंगा जैसी हो, शांत पर गहराई से भरपूर। मैं तुम्हें पाना नहीं चाहता, बस बहना चाहता हूं तुम्हारे साथ।"
🛑 परिवार और समाज की दीवारें
पर उनका प्यार आसान नहीं था।
रानी का परिवार थोड़ा रूढ़िवादी था – उन्हें लगता था कि जाति, इज़्ज़त और परंपरा प्रेम से ऊपर हैं।
जब रानी के घरवालों को पता चला, उन्होंने उसके स्कूल जाना बंद करवा दिया।
राजा को भी धमकियाँ मिलने लगीं – "अगर उस लड़की के पास गया तो तेरे बाप का खेत भी नहीं बचेगा।"
🛤️ फैसले की घड़ी
एक रात, रानी ने राजा को खत लिखा:
"अगर प्यार सच्चा है, तो मुझे मेरे रास्ते पर मिलना – स्टेशन के उस पुराने पुल के पास।"
राजा ने अपनी साइकिल उठाई और आंधी-पानी में उस पुल तक गया।
रानी आई। उसकी आंखों में आंसू थे।
राजा ने उसका हाथ थामा और कहा:
"हम भागेंगे नहीं… हम लड़ेंगे। लेकिन तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूंगा।"
🏠 नई शुरुआत
फिर क्या था – दोनों ने गाज़ीपुर कोर्ट मैरिज कर ली।
धीरे-धीरे दोनों परिवारों ने हालात को समझा।
समाज ने भी देखा कि ये प्रेम कोई शौक नहीं, एक प्रतिबद्धता है।
आज रानी एक स्कूल में टीचर है और राजा खेती के साथ-साथ एक NGO चलाता है जो गांव की बेटियों को पढ़ाता है।
❤️ कहानी का संदेश
"प्यार अगर सच्चा हो, तो समाज की दीवारें भी टूट जाती हैं।"
गाज़ीपुर की रानी और राजा ने यह साबित कर दिखाया।